Home उत्तर प्रदेश बसंत पंचमी कल… शुक्र अस्त के चलते नहीं होंगे मांगलिक कार्य

बसंत पंचमी कल… शुक्र अस्त के चलते नहीं होंगे मांगलिक कार्य

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लखनऊ : बसंत पंचमी शुक्रवार 23 जनवरी को मनाई जाएगी। सरस्वती पूजा मुहूर्त प्रात: 6:18 से दिन 12:18 तक श्रेष्ठ है। माघ मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी को बसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष पंचमी तिथि का प्रारम्भ गुरुवार 22 जनवरी की देर रात्रि 02:28 से होगी और शुक्रवार 23 जनवरी देर रात्रि 01: 46 को पंचमी तिथि समाप्त होगी यानी पंचमी तिथि 23 जनवरी को पूरे दिन रहेगी। बसंत पंचमी पर शुभ योग, चन्द्रमा कुम्भ राशि में प्रात: 08:33 के उपरांत मीन राशि में रहेगा व पूर्वाभाद्रप्रद नक्षत्र दिन में 02 :33 उपरांत उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में रहेंगे।

मकर राशि में 4 ग्रह-सूर्य, शुक्र, मंगल तथा बुध एक साथ होंगे तथा मंगल अपनी उच्च राशि में विराजमान रहेंगे। रवियोग एवं चन्द्रमा से चतुर्थ भाव में गुरु के होने से गजकेसरी का शुभ संयोग भी बन रहा है। ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल बताते हैं कि बसंत पंचमी अबूझ मुहूर्त है परन्तु इस वर्ष शुक्र के अस्त के चलते इस दिन विवाह और अन्य बड़े मांगलिक कार्य नहीं किए जाएंगे।

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ये पर्व ऋतुराज बसंत के आने की सूचना देता है। बसंत ऋतु में प्रकृति का सौंदर्य मन को मोहित करता है। मां सरस्वती को शारदा, वीणावादनी, वाग्देवी, भगवती, वागीश्वरी आदि नामों से जाना जाता है। इनका वाहन हंस है। बसंत पंचमी को देवी सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाते हैं। मां सरस्वती विद्या, गीत-संगीत, ज्ञान एवं कला की अधिष्ठात्री देवी है। इनको प्रसन्न करके इनके आर्शीवाद से विद्या, ज्ञान, कला प्राप्त किया जा सकता है।

बसंत पंचमी पर श्वेत वस्त्रावृत्ता मां सरस्वती की प्रातः स्नान कर इनकी पूजा-अर्चना करनी चाहिए। इनके पूजन में दूध, दही, मक्खन, सफेद तिल के लड्डू, गेहूं की बाली, पीले सफेद रंग की मिठाई और पीले सफेद पुष्पों को अर्पण कर सरस्वती के मंत्रों का जाप करना चाहिए। इस दिन पीले वस्त्र पहनने चाहिए और पीले रंग की खाद्य सामग्री के अधिकाधिक सेवन की भी परंपरा है।

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