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Kabir Mahotsav: ‘रुद्राक्ष’ में जीवंत हुए कबीर, आरंभ हुई काशी से मगहर की सांस्कृतिक यात्रा

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रुद्राक्ष सभागार में कबीर पर नाटक

रुद्राक्ष सभागार में कबीर पर नाटक
– फोटो : अमर उजाला

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श्रमसाधक कबीर की नगरी काशी में कबीर फिर से जीवंत हो उठे। रुद्राक्ष सभागार में कबीर संगीत, दोह, पद, साखी और सबद के जरिए कलाकारों ने दर्शकों को कबीर से रूबरू कराया। संत कबीर पर आधारित नृत्य नाटिका ने हर किसी का मन मोह लिया। आजादी के अमृत महोत्सव की शृंखला में रविवार की शाम को संस्कृति मंत्रालय की ओर से कबीर महोत्सव की काशी से मगहर की सांस्कृतिक यात्रा आरंभ हुई।

रविवार को नवीनतम भारत वंदना वंदे भूभातरम के समूह गायन रामकृष्ण महावीर की कर्मभूमि, मर्यादा का श्रेष्ठ गौरव… के साथ कबीर महोत्सव का श्रीगणेश हुआ। मुख्य अतिथि केंद्रीय संस्कृति राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि कबीर विद्रोही नहीं सनातन संस्कृति के अद्भुत ध्वजवाहक रहे हैं।

गायक व संगीतकार रामायण फेम सतीश देहरा व शंभू लहरी के गायन ने श्रोताओं को कबीर के भावों का हर स्पंदन दिल से महसूस कराया। रीवा की मुकुल सोनी, वाराणसी की डॉ. श्वेता जायसवाल, प्रियांशु घोष व पूजा राय ने भी कबीर के दोहों, पद और भजनों की प्रस्तुतियां दीं।

डॉ. विधि नागर एवं उनकी टीम ने कबीर पर आधारित नृत्य नाटिका के जरिए कबीर की फक्कड़ जीवन शैली और प्रसंगों को पेश किया। इस दौरान राज्यमंत्री स्वतंत्रत प्रभार रवींद्र जायसवाल, केसी मालू, अनिल के जाजोदिया, रीता चौधरी, उमाशंकर अग्रवाल, दीपक बजाज आदि मौजूद रहे।

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श्रमसाधक कबीर की नगरी काशी में कबीर फिर से जीवंत हो उठे। रुद्राक्ष सभागार में कबीर संगीत, दोह, पद, साखी और सबद के जरिए कलाकारों ने दर्शकों को कबीर से रूबरू कराया। संत कबीर पर आधारित नृत्य नाटिका ने हर किसी का मन मोह लिया। आजादी के अमृत महोत्सव की शृंखला में रविवार की शाम को संस्कृति मंत्रालय की ओर से कबीर महोत्सव की काशी से मगहर की सांस्कृतिक यात्रा आरंभ हुई।

रविवार को नवीनतम भारत वंदना वंदे भूभातरम के समूह गायन रामकृष्ण महावीर की कर्मभूमि, मर्यादा का श्रेष्ठ गौरव… के साथ कबीर महोत्सव का श्रीगणेश हुआ। मुख्य अतिथि केंद्रीय संस्कृति राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि कबीर विद्रोही नहीं सनातन संस्कृति के अद्भुत ध्वजवाहक रहे हैं।

गायक व संगीतकार रामायण फेम सतीश देहरा व शंभू लहरी के गायन ने श्रोताओं को कबीर के भावों का हर स्पंदन दिल से महसूस कराया। रीवा की मुकुल सोनी, वाराणसी की डॉ. श्वेता जायसवाल, प्रियांशु घोष व पूजा राय ने भी कबीर के दोहों, पद और भजनों की प्रस्तुतियां दीं।



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