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कानपुर फल मंडी जलकर हुई खाक, कई सिलेंडर भी फटे, करोड़ों का व्यापार बर्बाद

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यूपी के कानपुर से एक बड़ी घटना सामने आई है। शहर के व्यस्त फूलबाग इलाके स्थित फल मंडी में सोमवार को दोपहर के समय अचानक लगी भीषण आग ने पूरे क्षेत्र को हिलाकर रख दिया। इस दौरान कई सिलेंडर में भी ब्लास्ट की बात सामने आई। आग लगने का कारण पोल से शार्ट सर्किट बताया जा रहा है।

नेहरू युवा केंद्र के पास स्थित इस फल मंडी में आग की लपटें इतनी तेजी से फैलीं कि देखते ही देखते कई दुकानें, गोदाम और थोक स्टोर जलकर राख हो गए। प्राथमिक अनुमान के अनुसार, इस घटना में करोड़ों रुपए का सामान नष्ट हो गया है, जिससे सैकड़ों व्यापारियों की जिंदगी और उनकी गृहस्थी पूरी तरह से प्रभावित हो गई है।

घटना के प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग मंडी के एक हिस्से में अचानक भड़की और कुछ ही मिनटों में आसपास फैल गई। फल मंडी में फलों की पैकिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले लकड़ी के खोखे, गत्ते के डिब्बे, प्लास्टिक की सामग्री और अन्य ज्वलनशील पदार्थ बड़ी मात्रा में रखे रहते हैं। इन्हीं चीजों के कारण आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और तेज हवाओं की वजह से आसपास की दुकानों तक पहुंच गई। स्थानीय व्यापारियों ने शुरुआती दौर में खुद पानी और अन्य साधनों से आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन लपटों की तीव्रता के आगे उनकी प्रयास नाकाफी साबित हुए।

जब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई, तब दमकल विभाग को सूचना दी गई। जिसके बाद व्यापारियों का आरोप है कि सूचना मिलने के काफी समय बीत जाने के बावजूद मौके पर केवल एक ही फायर टेंडर पहुंचा। जब तक अतिरिक्त दमकल वाहन बुलाए गए, आग और भयावह रूप ले चुकी थी। मौके पर पहुंचे पहले वाहन का पानी भी जल्दी खत्म हो गया, जिससे आग बुझाने में काफी देरी हुई। इस दौरान कई व्यापारियों ने अपने निजी संसाधनों से पानी की व्यवस्था कर आग पर काबू पाने में मदद की। अंततः कई घंटों की मशक्कत के बाद दमकल की टीमों ने आग पर काबू पा लिया, लेकिन तब तक सब आग की लपटों के साथ साथ तबाह और बर्बाद हो चुका था।

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ये फल मंडी कानपुर के प्रमुख थोक बाजारों में से एक है, जहां रोजाना सैकड़ों टन फल, सब्जियां और संबंधित सामान का कारोबार होता है। कई दुकानदारों ने यहां अपनी पूरी पूंजी लगा रखी थी। आग में न सिर्फ फल का स्टॉक जल गया, बल्कि महंगे उपकरण, फर्नीचर और अन्य सामान भी नष्ट हो गए। घटना से प्रभावित व्यापारियों का कहना है कि उनकी जीवन भर की कमाई इस आग में स्वाहा हो गई। वहीं कुछ व्यापारियों ने अनुमान लगाया है कि कुल नुकसान कई करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक नुकसान का स्पष्ट और आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया गया है।

घटना के बाद मंडी क्षेत्र में व्यापारियों का भारी रोष देखने को मिला। बड़ी संख्या में दुकानदार एकत्र होकर दमकल विभाग और प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठाने लगे। उनका कहना है कि कानपुर जैसे बड़े औद्योगिक शहर में प्रमुख बाजारों और मंडियों में पर्याप्त अग्निशमन संसाधन होने चाहिए। केवल एक-दो फायर टेंडर पर निर्भर रहना घातक साबित हो रहा है। व्यापारियों ने मांग की है कि मंडी क्षेत्र में स्थायी फायर स्टेशन की स्थापना की जाए और अतिरिक्त फायर टेंडर की व्यवस्था हो।

इसके अलावा, उन्होंने बिजली विभाग से भी सख्ती बरतने की मांग की है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग शॉर्ट सर्किट या किसी विद्युत संबंधी खराबी से लगी हो सकती है। मंडी में पुरानी बिजली लाइनें और ओवरलोडेड कनेक्शन आम समस्या बताई जाती है।

सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति का जायजा लिया और प्रभावितों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया। अधिकारियों ने कहा कि आग के कारणों की गहन जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना कानपुर की बाजार सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवालिया निशान लगा गई है। बड़े बाजारों, मंडियों और व्यावसायिक इलाकों में फायर सेफ्टी को लेकर लापरवाही बरती जा रही है। ऐसे में समय की मांग है नियमित फायर ड्रिल, आधुनिक अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता और बुनियादी ढांचे की मरम्मत जैसे कदम तत्काल उठाए जाने चाहिए।

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