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दुर्गंध बनी शहर की पहचान, प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर जिम्मेदार नहीं कस पा रहे शिकंजा

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उन्नाव शहर के दोनों तरफ स्थित दो औद्योगिक क्षेत्रों से आने वाली दुर्गंध शहर की पहचान बन चुकी है। पिछले महीने दिशा की बैठक में जनप्रतिनिधियों ने इसे लेकर प्रदूषण विभाग को घेरा था। डीएम ने दोनों औद्योगिक क्षेत्रों की जांच कर दुर्गंध फैलाने वाले वैध और अवैध उद्योगों को चिन्हित करने का आदेश दिया था। हालांकि जांच टीमें एक महीने बाद भी रिपोर्ट नहीं दे पाईं।

शहर के दोनों तरफ औद्योगिक क्षेत्र हैं। कानपुर से आते समय हाईवे से सटा बंथर औद्योगिक क्षेत्र और लखनऊ की तरफ दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र हैं। इनमें छोटी-बड़ी चार सौ औद्योगिक इकाईयां हैं। इनमें अवैध रूप से ग्लू, पोल्ट्री फूड बनाने वाले कई कारखाने संचालित हैं। वहीं स्लाटर हाउस और टेनरियां भी हैं।

हालत यह है कि शहर में प्रवेश करने से पहले ही आने वाली तेज दुर्गंध उन्नाव शहर पास होने का अहसास करा देती है। पिछले महीने जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में सांसद साक्षी महाराज व अन्य विधायकों ने दुर्गंध और प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों की जांच और दुर्गंध के कारणों की जांच का आदेश दिया था। इसके बाद डीएम गौरांग राठी ने चार अगस्त को दही और बंथर औद्योगिक क्षेत्र की जांच के लिए अलग-अलग विभागों के पांच-पांच अधिकारियों की टीम बनाकर जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे। हालांकि अभी तक जांच रिपोर्ट नहीं आ पाई है। वहीं दूसरी तरफ औद्योगिक क्षेत्रों में कारखाना संचालकों की मनमानी जारी है।

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यदि हम जिम्मेदारों की बात करें तो उन पर इसका कोई असर नहीं पड़ रहा है। वह सिर्फ खानापूर्ति करके चुप्पी साध लेते हैं। जिसका खामियाजा आम जनता को जल, वायु एवं मृदा प्रदूषण के रूप में झेलना पड़ रहा है।

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