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नेपाल में जलप्रलय का खौफनाक मंजर, सैकड़ों लापता और चारों तरफ मलबा

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नेपाल के रसुवा में अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। सैलाब की रफ्तार इतनी तेज थी कि कई इलाकों में घर, पुल और सड़कें देखते ही देखते पानी में समा गए। तबाही की पिक्चर सामने आई है। इस अचानक आई भीषण बाढ़ में कई गांवों के पूरी तरह बह जाने की आशंका जताई जा रही है।

सबसे बड़ी चिंता लापता लोगों को लेकर है। नेपाल पर्यटन बोर्ड के मुताबिक, 384 पर्यटक लापता हैं। इनमें 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। लापता लोगों में 105 भारतीय नागरिक भी हैं।

भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड्स, अमेरिका, ब्रिटेन, मलेशिया और दक्षिण अफ्रीका के नागरिक भी शामिल हैं। वहीं, कई अन्य विदेशी पर्यटकों की राष्ट्रीयता की पुष्टि होना अभी बाकी है। तबाही के बाद नेपाल सरकार ने रेस्क्यू ऑपरेशन तेज कर दिया है। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने आपात बैठक बुलाकर हालात की समीक्षा की है।

सेना के हेलीकॉप्टरों और आपदा राहत टीमों को प्रभावित इलाकों में भेजा गया है। MI-17 हेलीकॉप्टर को मेडिकल और रेस्क्यू टीम के साथ तैनात किया गया है, जबकि नेपाल सेना, आर्म्ड पुलिस फोर्स और नेपाल पुलिस के जवानों को रसुवा और आस-पास के इलाकों में उतारा गया है। सैलाब ने नेपाल के इंफ्रास्ट्रक्चर को भी बड़ा नुकसान पहुंचाया है। कई हाईवे और संपर्क मार्ग बंद हो गए हैं। पुलों के बह जाने से प्रभावित इलाकों तक पहुंचना रेस्क्यू एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

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नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के मुताबिक, छह बड़े हाइड्रोपावर और ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स को नुकसान पहुंचा है। बाढ़ से बिजली उत्पादन और ट्रांसमिशन व्यवस्था पर भी असर पड़ा है। अब तक कई शव बरामद किए जा चुके हैं और अधिकारियों को आशंका है कि जैसे-जैसे राहत दल प्रभावित इलाकों तक पहुंचेंगे, मृतकों और लापता लोगों का आंकड़ा बढ़ सकता है।

रसुवा में तबाही का मंजर ऐसा है कि नदी किनारे बसे गांवों से लेकर सड़क, पुल और बिजली परियोजनाओं तक सबकुछ सैलाब की चपेट में आ गया है। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती मलबे और तेज बहाव के बीच 384 लापता लोगों को तलाशना और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना है। नेपाल में कुदरत का कहर बरपा है… और रेस्क्यू ऑपरेशन के साथ अब हर गुजरता घंटा जिंदगी बचाने की जंग बन गया है।

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