Home उत्तर प्रदेश रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने यूपी स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में...

रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने यूपी स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में जीता मेडल

0
58

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से इस वक्त एक बड़ी खबर सामने आई है। यहां के कुंडा के विधायक और जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने खेल की दुनिया में कमाल कर दिया है। राजा भैया ने नई दिल्ली की डॉ. करणी सिंह शूटिंग रेंज में आयोजित 49वीं यूपी स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक यानी ब्रॉन्ज मेडल जीता है।

उन्होंने पुरुष व्यक्तिगत वर्ग में बेहतरीन निशाना साधते हुए 25 अंकों का स्कोर बनाया और तीसरा स्थान हासिल किया। नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के आजीवन सदस्य राजा भैया की इस कामयाबी पर प्रतापगढ़ और कुंडा के समर्थकों में खुशी की लहर है। राजा भैया की इस बड़ी उपलब्धि का एक वीडियो उनकी पार्टी- जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के ऑफिशियल सोशल मीडिया पेज पर भी पोस्ट किया गया है।

रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के सियासी सफर की बात करें तो उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1993 में मात्र 24 वर्ष की उम्र में प्रतापगढ़ की कुंडा विधानसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में की थी। अपने पहले ही चुनाव में भारी मतों से जीत दर्ज करने के बाद, उन्होंने कुंडा को अपना ऐसा अभेद्य किला बनाया और 1996, 2002, 2007, 2012 और 2017 के चुनावों में भी वे लगातार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में ही भारी अंतर से जीतते रहे। इस दौरान उनकी राजनीतिक ताकत इतनी बढ़ गई कि किसी भी पार्टी के टिकट के बिना भी वे सूबे की सियासत में ‘किंगमेकर’ की भूमिका में आ गए। यही वजह थी कि विचारधारा के स्तर पर पूरी तरह विपरीत होने के बावजूद, भारतीय जनता पार्टी के कल्याण सिंह, राम प्रकाश गुप्ता और राजनाथ सिंह की सरकारों में उन्हें खेल एवं युवा कल्याण मंत्री बनाया गया, और बाद में समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह यादव व अखिलेश यादव की सरकारों में भी वे कैबिनेट मंत्री (खाद्य एवं रसद और जेल मंत्री) पद पर काबिज रहे।

यह भी पढ़ें -  बिहार शिक्षक भर्ती: वेतन पर नीतीश कुमार का स्पष्टीकरण, भ्रम के बीच प्रक्रिया

राजा भैया के इस सफर में 2002 का साल सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती के साथ उनके गहरे राजनीतिक मतभेद हो गए। मायावती सरकार ने उन पर कड़ा शिकंजा कसते हुए आतंकवाद निरोधक कानून (POTA) लगा दिया, जिसके बाद उन्हें लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा। हालांकि, 2003 में जैसे ही सपा की सरकार बनी, उन पर से पोटा हटा लिया गया और जेल से बाहर आते ही वे सीधे मंत्री पद की शपथ लेने पहुंचे।

निर्दलीय राजनीति में 25 साल पूरे करने के बाद, उन्होंने साल 2018 में अपनी खुद की पार्टी- जनसत्ता दल लोकतांत्रिक का गठन किया। इसके बाद, 2022 के विधानसभा चुनाव में पहली बार अपनी पार्टी के सिंबल पर उतरकर वे कुंडा से लगातार 7वीं बार विधायक चुने गए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here