लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मंगलवार को हुई मूसलाधार बारिश के बाद कई जिलों में बाढ़ का खतरा और गहरा गया है। गंगा, यमुना, घाघरा व मंदाकिनी समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ने से तटीय इलाकों में प्रशासन की चिंता बढ़ी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार पूर्वी यूपी में बुधवार को भारी बारिश की चेतावनी है, जबकि पश्चिमी यूपी में भी भारी बारिश और मेघगर्जन-वज्रपात का अलर्ट है। पश्चिमी यूपी में तीन से पांच सितंबर तक भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
लगातार बारिश और ऊपरी क्षेत्रों से पानी आने के कारण गंगा, यमुना और मंदाकिनी समेत नदियों के जलस्तर में वृद्धि प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। प्रयागराज में गंगा-यमुना और वाराणसी में गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण तटवर्ती बस्तियों में निगरानी बढ़ाई गई है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि नदी, नाले और जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से न जाएं। बुधवार की बारिश के बाद अगले कुछ दिनों में नदियों का जलस्तर और बढ़ने की स्थिति में पूर्वांचल, बुंदेलखंड और पश्चिमी यूपी के तटवर्ती जिलों में बाढ़ का खतरा और बढ़ सकता है।
मंगलवार की बारिश के बाद चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा और निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालने की जरूरत पड़ी। वहीं प्रयागराज में गंगा और यमुना के बढ़ते जलस्तर से नदी किनारे बसे इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंचने लगा है। वाराणसी में भी गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी है।
बाढ़ का खतरा अब केवल पूर्वांचल और बुंदेलखंड तक सीमित नहीं है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी बुधवार से अगले कई दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। मुरादाबाद, बरेली, पीलीभीत, रामपुर, अमरोहा, संभल, बदायूं, एटा, कासगंज, मथुरा, हाथरस, आगरा, फिरोजाबाद और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश से जलभराव और नदियों के जलस्तर बढ़ने की आशंका है। पश्चिमी यूपी में गंगा, यमुना और चंबल जैसी नदियों से जुड़े निचले इलाकों पर विशेष नजर रखने की जरूरत है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए योगी सरकार ने राहत और बचाव व्यवस्था को सक्रिय रखने के निर्देश दिए हैं। जिला प्रशासन को नदियों के जलस्तर, तटवर्ती गांवों और जलभराव वाले इलाकों पर लगातार नजर रखने तथा जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने को कहा गया है। राहत सामग्री, नाव, गोताखोर और बचाव दलों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर है। सरकार का कहना है कि बाढ़ या आकस्मिक बाढ़ की स्थिति में किसी भी जरूरतमंद तक समय से मदद पहुंचना सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रशासन को मौसम की हर गतिविधि पर नजर रखते हुए स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तत्काल निर्णय लेने के निर्देश दिए गए हैं।
बाढ़ प्रभावित चित्रकूट में प्रभारी मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर हालात का जायजा लिया। उन्होंने बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत किट वितरित की और अधिकारियों से प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचने की जानकारी ली। नंदी ने प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित परिवारों की हरसंभव मदद की जाए और राहत कार्य में किसी तरह की लापरवाही न हो। चित्रकूट में राहत-बचाव अभियान के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित निकाले जाने की भी जानकारी सामने आई है।








