Home उत्तर प्रदेश Varanasi: जेल की दीवारों पर बंदियों ने उकेरा काशी विश्वनाथ धाम, रोजाना...

Varanasi: जेल की दीवारों पर बंदियों ने उकेरा काशी विश्वनाथ धाम, रोजाना पूजा कर गुनाहों के लिए मांगते हैं माफी

0
87

[ad_1]

वाराणसी के जिला जेल चौकाघाट में हुनरमंद बंदियों ने दीवारों पर श्री काशी विश्वनाथ धाम का चित्र उकेरा है। चित्र के सहारे वह बाबा विश्वनाथ का दर्शन पूजन जेल के अंदर  ही कर रहे हैं। इसके अलावा बंदियों ने संत कबीर जन्मस्थली, तुलसीदास और भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली सारनाथ, काशी के घाट की विश्व प्रसिद्ध आरती समेत काशी की  छटा दीवारों पर उकेरी है।  जिला जेल अधीक्षक अरुण कुमार सक्सेना के अनुसार, अमृत महोत्सव के तहत बंदियों ने काशी के प्रमुख स्थलों को जेल परिसर की दीवारों पर उकेरा है।

थ्री डी तस्वीरों को तीन बंदियों ने तीन महीने में तैयार किया है।  बंदी कलाकारों की मांग पर सीमेंट, रेत, रंग और अन्य सामग्री उपलब्ध कराई गई है। पेंटिंग तीन बंदियों राक्षस बच्चन द्रविड़,  भोलाराम और मनीष शर्मा ने बनाया है। कुछ बंदियों ने इनका सहयोग भी किया है।

कानून की बंदिशों के चलते जेल के बंदी बाबा के चौखट तक नहीं जा सकते, लेकिन ‘जहां चाह वहां राह’ की कहावत को चरितार्थ करते हुए बंदियों ने विश्वनाथ धाम की हूबहू तस्वीर जेल की दीवारों पर बना दी है। अब अधिकांश बंदी आस्था के साथ बाबा के इसी दरबार में रोजाना हाजिरी लगाते हैं और अपने गुनाहों की माफी भी मांगते हैं। 

यह भी पढ़ें -  Atiq Ashraf Murder: जिस बैरक में थे राजा भैया, अब वहीं रखे गए अतीक-अशरफ को मारने वाले शूटर, जानें क्या है खास

जेल में रविदास स्मारक पार्क में बंदियों की ओर से बनाए गए चित्र में मां गंगा और संत रैदास हैं। यही नहीं, बैकग्राउंड में बड़ी ही खूबसूरती से संत रविदास मंदिर भी बनाया गया है। जेल परिसर में ही भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली सारनाथ, संत कबीर जन्म स्थल लहरतारा और गोस्वामी तुलसी दास आश्रम सहित अन्य बनारस की सांस्कृतिक झलकियों की तस्वीरें एकदम जीवंत हैं। 

हम भी दरिया हैं, हमें अपना हुनर मालूम हैं… जिस तरफ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा… यह पंक्तियां इस समय वाराणसी जिला जेल के कुछ बंदियों पर सटीक बैठ रही है। भले ही वो अभी अपराध के चलते कानून की जंजीरों में जकड़े हैं, लेकिन उनके हाथ की कूंची इस समय जिला जेल की दीवारों पर रंग बिखेर रही है।

जिला जेल में एक शिव मंदिर भी बंदियों द्वारा बनाया गया है। नवरात्र पपर्व पर विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा की गई है। रोजाना पूजन-अर्चना के बाद प्रसाद वितरण भी किया जाता है। अभी कुछ टाइल्स वगैरह का कार्य चल रहा है। 

 



[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here