रामपुर : नवरात्र के पावन पर्व पर व्रत खोलना कई परिवारों के लिए भारी पड़ गया। शहर में कुट्टू के आटे से बनी पकौड़ी और पराठे खाने से एक दर्जन से अधिक लोगों की अचानक तबीयत बिगड़ गई। फूड प्वाइजनिंग के शिकार हुए इन सभी मरीजों को सोमवार तड़के गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। इस घटना के बाद से व्रत में इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थों की शुद्धता को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
अस्पताल में भर्ती मरीजों ने बताया कि उन्होंने शहर की अलग-अलग दुकानों से कुट्टू का आटा खरीदा था। पीड़ितों के मुताबिक, मोहल्ला राजद्वारा और चूने वाला फाटक स्थित दुकानों से यह आटा लाया गया था। रविवार की शाम को इसी आटे से पकौड़ी और पराठे बनाए गए, जिन्हें परिवार के लोगों ने नवरात्र का उपवास खोलने के लिए खाया था। खाना खाने के कुछ देर बाद ही लोगों को चक्कर आने लगे, उल्टियां शुरू हो गईं और पेट में तेज दर्द होने लगा। रात बीतने के साथ हालत और ज्यादा गंभीर हो गई।
हालत ज्यादा बिगड़ने पर सोमवार तड़के परिजनों ने पीड़ितों को आनन-फानन में जिला अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में भर्ती माला रोड स्थित सैनी कॉलोनी निवासी 35 वर्षीय अमृता ने बताया कि वह रविवार दोपहर चूने वाला फाटक स्थित दुकान से आटा लाई थी। शाम को उसने और उसकी सास रानी ने कुट्टू के आटे की पकौड़ियां दही और चटनी के साथ खाई थीं, जिसके बाद दोनों की तबीयत बिगड़ गई। अमृता के पति आकाश ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया।
इसी तरह फूटा महल निवासी सलोनी रस्तोगी पुत्री संजीव रस्तोगी, सेवानिवृत्त शिक्षिका विनीता रस्तोगी निवासी कैथ वाली मस्जिद और संजीव रस्तोगी समेत करीब एक दर्जन लोगों को फूड प्वाइजनिंग की शिकायत पर अस्पताल लाना पड़ा।
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. बी सी सक्सेना ने बताया कि विषाक्त कुट्टू का आटा खाने से बीमार हुए करीब एक दर्जन मरीजों का अस्पताल में इलाज किया गया है। इनमें से कुछ मरीजों की हालत में सुधार होने के बाद उन्हें डिस्चार्ज भी कर दिया गया है, जबकि अन्य का उपचार जारी है।
त्योहारों के सीजन में इस तरह की घटनाएं सामने आने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर बाजारों में मिलावटी या पुराना आटा खुलेआम कैसे बिक रहा है।








