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योगी कैबिनेट में 39 प्रस्तावों पर लगी मुहर, खरीद नीति में भी होगा बदलाव

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने और शहरी विकास को नियोजित बनाने के लिए सरकार ने कई अहम फैसले किए हैं। प्रदेश में 1725 नई बसें खरीदी जाएंगी, जबकि राजधानी लखनऊ में 265 करोड़ रुपये की लागत से इंटीग्रेटेड बस रैपिड ट्रांजिट केंद्र विकसित किया जाएगा। इसके अलावा विकास प्राधिकरणों से बाहर के 559 नगर निकायों में भी मास्टर प्लान तैयार करने के लिए एक समान मानक लागू करने की तैयारी है। सरकार ने धान खरीद के लिए पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में अलग-अलग समयसीमा भी निर्धारित की है।

प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए 1725 नई बसों की खरीद की जाएगी। कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बताया कि परिवहन विभाग ने बस खरीद के लिए नई नीति तैयार की है। इसके तहत निविदा में सबसे कम दर देने वाली कंपनी यानी एल-1 के आधार पर खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

नई व्यवस्था में निविदा प्रक्रिया में भाग लेने वाले प्रदेश के परिवहन निगमों को भी बस खरीद का अवसर मिलेगा। बसों का आवंटन निविदा में प्राप्त दरों और प्रतिभाग करने वाले परिवहन निगमों की भागीदारी के आधार पर किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से खरीद प्रक्रिया में प्रदेश के परिवहन निगमों की भागीदारी सुनिश्चित करने के साथ सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

राजधानी में यात्रियों की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए करीब 60 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में इंटीग्रेटेड बस रैपिड ट्रांजिट केंद्र विकसित किया जाएगा। इस परियोजना पर 265 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसे सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर तैयार किया जाएगा।

कैबिनेट ने परियोजना के लिए ओमैक्स लिमिटेड की सबसे ऊंची बोली को मंजूरी दी है। निविदा प्रक्रिया में चार कंपनियों ने भाग लिया था। चयनित कंपनी परियोजना का विकास करेगी और निर्धारित शर्तों के अनुसार सरकार को राशि भी देगी। इस केंद्र के निर्माण से राजधानी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने और यात्रियों की बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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प्रदेश में नियोजित शहरी विकास को बढ़ावा देने के लिए उन नगर निकायों में भी मास्टर प्लान तैयार कराने की व्यवस्था विकसित की जाएगी, जहां विकास प्राधिकरण स्थापित नहीं हैं। प्रस्ताव के अनुसार, उत्तर प्रदेश में कुल 762 नगरीय निकाय हैं। इनमें से 559 निकाय ऐसे हैं, जहां विकास प्राधिकरण नहीं हैं। फिलहाल विकास प्राधिकरण अपने क्षेत्रों में भवन निर्माण के मानचित्रों और मास्टर प्लान तैयार करने का काम करते हैं।

प्राधिकरणों के दायरे से बाहर आने वाले नगर निकायों में नियोजन और विकास के मानकों में एकरूपता का अभाव है। इसे दूर करने के लिए विकास प्राधिकरणों और आवास विकास विभाग की ओर से तैयार मास्टर प्लान के मानकों के आधार पर इन नगर निकायों में भी नियोजित विकास की व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। इससे शहरी विकास की प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।

प्रदेश में नियोजित शहरी विकास को बढ़ावा देने के लिए उन नगर निकायों में भी मास्टर प्लान तैयार कराने की व्यवस्था विकसित की जाएगी, जहां विकास प्राधिकरण स्थापित नहीं हैं। प्रस्ताव के अनुसार, उत्तर प्रदेश में कुल 762 नगरीय निकाय हैं। इनमें से 559 निकाय ऐसे हैं, जहां विकास प्राधिकरण नहीं हैं। फिलहाल विकास प्राधिकरण अपने क्षेत्रों में भवन निर्माण के मानचित्रों और मास्टर प्लान तैयार करने का काम करते हैं।

प्राधिकरणों के दायरे से बाहर आने वाले नगर निकायों में नियोजन और विकास के मानकों में एकरूपता का अभाव है। इसे दूर करने के लिए विकास प्राधिकरणों और आवास विकास विभाग की ओर से तैयार मास्टर प्लान के मानकों के आधार पर इन नगर निकायों में भी नियोजित विकास की व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। इससे शहरी विकास की प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।

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